एक 6 साल का मासूम बच्चे के साथ हैवानियत,दुष्कृत्य के बाद हत्या मासूमियत का फायदा उठाया ।

हरदा जिले के पास ग्राम सुखरास में 12 फरवरी को एक ऐसा ही दिल दहला देने वाला मामला सामने आया। पुराने मिडिल स्कूल के खंडहर भवन में एक छोटे बच्चे का शव मिलने की सूचना ने पूरे इलाके को हिला दिया।

लेकिन सवाल ये था—आख़िर इस मासूम के साथ हुआ क्या?पुलिस ने जैसे ही सूचना पाई, मर्ग क्रमांक 06/2026 के तहत मामला दर्ज कर जांच शुरू की। घटना स्थल का बारीकी से निरीक्षण किया गया। एफएसएल टीम और फिंगरप्रिंट एक्सपर्ट को बुलाया गया।

बच्चे का शव सुनसान पड़े खंडहर में कपड़े से ढका हुआ मिला—ये दृश्य ही अपने आप में कई सवाल खड़े कर रहा था।क्या यह सिर्फ एक हादसा था?या इसके पीछे कोई दरिंदगी छिपी थी?परिजनों और गवाहों से पूछताछ हुई। पोस्टमार्टम डॉक्टरों की पैनल से कराया गया। शुरुआती साक्ष्यों ने इशारा किया कि बच्चे के साथ दुष्कृत्य के बाद हत्या की गई हो सकती है।

अब मामला बेहद गंभीर हो चुका था।थाना सिविल लाइन हरदा में अपराध क्रमांक 53/2026 धारा 103(1) बीएनएस और POCSO एक्ट की धारा 5m/6 के तहत अज्ञात आरोपी के खिलाफ मामला दर्ज किया गया।

पुलिस अधीक्षक श्री शशांक ने तुरंत सख्त निर्देश दिए—“आरोपी को जल्द से जल्द पकड़ना है।”क्या पुलिस इतनी जल्दी किसी सुराग तक पहुँच पाएगी?एक विशेष टीम बनाई गई। गांव और आसपास के सीसीटीवी फुटेज खंगाले गए।

और फिर… एक अहम सुराग मिला।फुटेज में बच्चा घटना स्थल की ओर जाता दिखा। कुछ देर बाद, उसके पीछे एक व्यक्ति जाता दिखाई दिया। लेकिन लौटते समय सिर्फ वही व्यक्ति वापस दिखा—बच्चा नहीं।यहीं से शक गहराया।गांव के बच्चों ने बताया कि कॉलोनी में रहने वाला एक परिचित व्यक्ति बच्चे को कुरकुरे खिलाकर खेत की ओर चलने की बात कह रहा था।

क्या मासूमियत का फायदा उठाया गया?तकनीकी साक्ष्यों और गोपनीय जानकारी के आधार पर पुलिस ने संदिग्ध से मनोवैज्ञानिक तरीके से पूछताछ की। और आखिरकार… उसने अपना जुर्म कबूल कर लिया।

उसने बताया कि उसने बच्चे को कुरकुरे खिलाकर दोस्ती की, फिर बड़ी बोर (बेर) दिलाने का लालच देकर खंडहर स्कूल में ले गया। वहां एक कमरे में उसके साथ दुष्कर्म किया और जब बच्चा चिल्लाने लगा तो मुंह दबाकर उसकी हत्या कर दी।

शव को छुपाने के लिए बेंच आड़ी करके उस पर लिटाया और कपड़े से ढक दिया।क्या कोई इंसान इतनी हैवानियत तक गिर सकता है?पुलिस ने आरोपी भूरा पिता लक्ष्मीनारायण उईके, उम्र 35 वर्ष, निवासी ग्राम सुखरास को 24 घंटे के अंदर गिरफ्तार कर लिया। मेडिकल परीक्षण के बाद उसे न्यायालय में प्रस्तुत किया जाएगा।

इस पूरे ऑपरेशन में थाना प्रभारी रामसुमेर तिवारी और उनकी टीम—उपनिरीक्षक संतोष बामने, प्रधान आरक्षक अनिल मर्सकोले, आरक्षक वीरेन्द्र राजपूत, चालक सचिन चौधरी और सैनिक सूरज पासी—ने सराहनीय भूमिका निभाई।

लेकिन इस घटना ने एक बड़ा सवाल छोड़ दिया है—क्या हम अपने बच्चों को सुरक्षित रख पा रहे हैं?

क्या हमें अपने आस-पास के लोगों पर आंख मूंदकर भरोसा करना चाहिए?

और सबसे ज़रूरी—क्या बच्चों को “गुड टच और बैड टच” के बारे में जागरूक करना अब पहले से ज़्यादा जरूरी नहीं हो गया है?

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