हॉस्पिटल सेवा नहीं अब उद्योग बन गए । ये कैसे भगवान ?

लेखक वरिष्ठ पत्रकार डी.एस. चौहान

इलाज सेवा की जगह उद्योग में परिवर्तन हो गया है मनावता शब्द कहने में आ रही शर्म
बाहरी जिले के डाक्टर हरदा में आकर सिर्फ जनता को भ्रमित करके पैसा कमाने की होड में लगे हैं
डाक्टर भगवान का रुप था मगर अब ठगी करने में अब्बल कहलाने लगे
हरदा मुख्यालय सहित जिले में हर बीमारी के डाक्टर है शासकीय अस्पताल में भी डाक्टर आपनी सेवा दे रहे हैं लेकिन हरदा मुख्यालय पर आजकल बाहरी डाक्टरों को बुलाने की होड लगी गयी सोशल मीडिया पर विज्ञापन दिया जा रहा है इतना ही नहीं गांव गांव घूमकर कुछ ऐजेंट सक्रिय हो गये है
बाहरी डाक्टरों का अड्डा बन गया हरदा जिला
हरदा मुख्यालय सहित पूरे जिले में मेडीकल स्टोर संचालक आजकल विभिन्न बीमारियों का हवाला देकर बाहरी डाक्टरों को प्राथमिकता देकर अधिक कमाई करने में लगे डाक्टर से मिलने के लिए 500 से 800 रुपए फीस का आंकलन है बाहरी डाक्टर जो दवा लिखते हैं सिर्फ उसी मेडीकल पर उपलब्ध रहेगी ओर जांच भी तय है कि फलाने के यहा से ही करवाना है ओर डाक्टर साहब कह देते हैं कि तुम तो तीन दिन बाद सीधे इन्दौर भोपाल जहां क्लीनिक है वहा आ जाना आमजन तो अनभिज्ञ हैं ओर फिर चला जाता है बाद में पता चलता है कि हजारों रुपए लग गये मगर कोई आराम नहीं मिला
हरदा मुख्यालय सहित विभिन्न क्षेत्रों में नर्सिंग होम व डाक्टर है
हरदा मुख्यालय पर हर बीमारी के अनुभव शील डाक्टर उपलब्ध है लेकिन मेडिकल स्टोर वाले आपना स्वार्थ सिद्ध करने के लिए बाहरी डाक्टर से इलाज की सलाह बखूबी देते नजर आ रहे अधिकांश लोग इलाज के चक्कर में बर्बाद हो रहे जबकि स्थानीय डाक्टरों के इलाज से हर बीमारी का इलाज संभव है ओर हो रहा है हरदा मुख्यालय पर छनेरा खातेगांव सिवनी मालवा से मरीज आकर स्थानीय डाक्टरों से इलाज करवा रहे हैं लेकिन आजकल हरदा मुख्यालय सहित विभिन्न तहसील में बाहरी डाक्टरों ओर मेडीकल स्टोर की सांठगांठ से मनावता एक उद्योग के रूप में चल रही है जो सोचनीय विषय है क्योंकि डाक्टर को भगवान का दर्जा दिया जाता है लेकिन कोरोना काल से कुछ डाक्टरों ने मनावता शब्द ही खत्म कर दिया है जो एक सोचनीय विषय है
हरदा जिले में बाहरी डाक्टर से इलाज की जगह स्थानीय डाक्टरों की सेवा ले
हरदा कृषि प्रधान जिला है उद्योग के ममाले में शून्य है क्योंकि आरामशीन एक दो आटा दाल मिल है माध्यम वर्ग अधिकांश व्यापार पर निर्भर है प्रायवेट काम में इतना वेतन नहीं है अधिकांश संविदा कर्मचारियों है लेकिन बाहरी डाक्टर से इलाज करवाना महंगा पड़ रहा है शासन ने भी आजकल बाहरी डाक्टरों को आकर जिले में छूट दे दी है लेकिन हरदा में आमजन को आगे आकर बाहरी डाक्टर से इलाज करने की जगह स्थानीय डाक्टरों की सेवा लेनी चाहिए ताकि ठगी से बच सकते हैं आज बाहरी डाक्टरों की आड़ में मेडिकल स्टोर में खुली ठगी हो रही है
हरदा जिले में शासकीय अस्पताल के डाक्टर व स्टाप आज भी मनावता का परिचय देते हुए आपनी सेवा दे रहे हैं

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