पब्लिक रो रही है 2 दिन से ….200 नल कनेक्शन का चार्ज कर दिया नगर पालिका ने।अब रोने से क्या होगा ?इसी शहर की पब्लिक ने पूर्ण बहुमत दिया था, भाजपा शासित नगरपालिका को। उस पूर्ण बहुमत के आधार पर, उन्होंने 200 नल कनेक्शन चार्ज का प्रस्ताव पारित कर दिया है।

विपक्ष के पार्षद चिल्लाते रहे। विरोध करते रहे। उनकी एक न सुनी यानी भाजपा के लोगों का रोल कम है इस शहर की पब्लिक के पूर्ण बहुमत का रोल अधिक है। बीजेपी वालों ने मीठी-मीठी बात करके नगर पालिका चुनाव में खूब वोट बटोरे… पब्लिक भी सम्मोहन की शिकार हो गई… कुछ नहीं देखा।

जब अपने ही पैरों पर कुल्हाड़ी मार ली है तब रोने से क्या फायदा ?पब्लिक हित के विरोध में जितने भी प्रस्ताव भाजपा शासित नगर पालिका लेकर आ रही है, वह पूर्ण बहुमत के आधार पर ही पारित कर लेती है !इसमें विपक्ष के पार्षदों की नहीं सुनी जाती क्योंकि उनकी संख्या कम है ।इसलिए उनका विरोध का कोई मायने ही नहीं है।

इसमें अहम रोल शहर की जनता का है जिसने वोट देते समय कुछ नहीं देखा ।और नेताओं की चिकनी चुपड़ी बातों में फंस गए।छ्प्पर फाड़ कर वोट दे दिया।जबकि चुनाव में आधे-आधे दोनों पार्टी के पार्षद चुन लेती, जनता ।भले ही भाजपा शासित नगर पालिका बन जाती लेकिन कमान पब्लिक के हाथों में होती।इन पर अंकुश रहता।डर सताता रहता।
तब पब्लिक के हितों को ध्यान में रखा जाता। जिस वार्ड से नगर पालिका अध्यक्ष चुनाव जीती है, उसको विकास नगर कहते हैं। लेकिन एक बार वहां जाकर जरूर देखें ।वहां के लोग भी रो रहे हैं। पिछले दिनों एक वीडियो जारी हुआ था अध्यक्ष के पति का,जिसमे खुलेआम धमकी दे रहे थे। विकास नगर के परिवार को बोल रहे थे ज्यादा मुंह खोला तो तेरे घर में पानी घुसेड दूंगा ।

इतना घमंड कहां से आ गया?यह अधिक बहुमत देने का परिणाम है।जलकर वृद्धि के पीछे नगर पालिका तर्क दे रही है कि महंगाई बढ़ गई।जबकि सफाई, पानी, और बिजली। नॉमिनल चार्ज पर देने की जिम्मेदारी नगर पालिका की हैं। इसके लिए मध्य प्रदेश सरकार प्रति माह इनको फंड उपलब्ध कराती है।
जितना पैसा पानी उपलब्ध कराने में खर्च हो रहा है ।अगर उसको ध्यान में रखकर जलकर वृद्धि किया जाए तो ₹200 नहीं ₹1000 प्रति नल कनेक्शन लेना पड़ेगा।लेकिन मध्य प्रदेश सरकार शहर के लोगों को बिजली, सफाई और पानी सस्ती दरों पर उपलब्ध कराने के लिए फंड प्रदान कर रही है।फिर भी नगर पालिका की नीति साफ नहीं है। इसलिए जलकर में 75 रुपए से बढ़ाकर ₹200 तक वृद्धि कर दी है।
पब्लिक के हितों की कैसे रक्षा की जानी चाहिए ?इनके पास दृष्टि नहीं है।इसलिए रोने का अब कोई फायदा नहीं ?इनकी परिषद का एक भाजपा पार्षद बैठक में मुस्कुराते हुए बोल रहा है कि लोग ₹200 की दारू पी जाते हैं पानी के ₹200 क्यों नहीं दे सकते ?क्या गजब के लोग चुनकर पब्लिक ने भेजें हैं।इतने भद्दे शब्दों का इस्तेमाल करते हुए पार्षद वीडियो में दिखाई दे रहा है ।
फिर भी भाजपा की तरफ से एक भी बयान नहीं आया ।अगर किसी दूसरी पार्टी का पार्षद ऐसा बोल देता तो अभी तक उसके पुतले फूंक देते।यह है नैतिकता…इसलिए सहना तो पड़ेगा
