नया खुलासा: पलासनेर में भ्रष्टाचार छिपाने की ‘रात की साज़िश’ — शिकायत के 4 दिन बाद जेसीबी से खुदवाए गए ‘कागज़ी’ तालाब!

हरदा।मध्य प्रदेश की हरदा जिले की ग्राम पंचायत पलासनेर में लाखों के भ्रष्टाचार और अनियमितताओं को लेकर उपजा विवाद थमने का नाम नहीं ले रहा है। ग्रामीणों द्वारा कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ को शिकायत किए जाने के चार दिन बाद, सरपंच और सचिव पर भ्रष्टाचार छिपाने की जल्दबाजी का गंभीर आरोप लगा है।

ग्रामीणों के अनुसार, पंचायत के जिम्मेदारों ने आनन-फानन में रात के समय जेसीबी मशीन लगाकर उन दो तालाबों को खुदवा दिया, जिनकी राशि पूर्व में ही मनरेगा के फर्जी मास्टर रोल के जरिए निकाली जा चुकी थी। यह तालाब फतेहचंद भगवान दास व दूसरा नरेंद्र सिंह मंडलोई को स्वीकृत किए थे।

जाँच टीम का ग्रामीण कर रहे थे इंतज़ार-ग्राम पलासनेर के उपसरपंच अजय मिश्रा और ग्रामीण नारायण सिंह चौहान समेत दो दर्जन से अधिक ग्रामीणों ने 10 दिसंबर को कलेक्टर और जिला पंचायत सीईओ से सरपंच श्रीमती सरोज चौरसिया, सचिव ओम प्रकाश गुर्जर की मिलीभगत की लिखित शिकायत की थी ।

उसी जगह पर सोशल ऑडिट की गई है। जिसमें भ्रष्टाचार को छुपाया गया है।इस ओर जिला प्रशासन का भी संरक्षण मिल रहा है। जिस पर सवाल खड़े हो रहे हैं।ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि शिकायत के बाद जब गाँव में जाँच टीम नहीं पहुँची, तो पंचायत के जिम्मेदारों ने इसी बात का फायदा उठाया।

उपसरपंच अजय मिश्रा ने बताया, “शिकायत के बाद गाँव के लोग जाँच टीम का इंतजार कर रहे थे, लेकिन जब जाँच टीम नहीं आई, तो पंचायत के जिम्मेदारों ने रात के अँधेरे में जेसीबी के माध्यम से दोनों तालाब खुदवा दिए।

“बता दे कि यह कार्रवाई मनरेगा के प्रावधानों का खुला उल्लंघन है, क्योंकि ये तालाब मजदूरों के हाथों खुदवाए जाने थे, लेकिन यहाँ फर्जी मास्टर रोल जारी कर राशि पहले ही आहरित कर ली गई थी।सरकारी राशि का दुरुपयोग ओर निजी निर्माण दो तालाब: कागजों पर दिखाकर राशि निकाली गई, जिसे शिकायत के बाद जेसीबी से खुदवाया गया।

दो सीसी सड़कें: कागज़ों पर बनी, लेकिन ज़मीन पर उनका कोई बावजूद नहीं।स्ट्रीट लाइट: 1 लाख 20 हज़ार की स्ट्रीट लाइट की राशि निकाली गई, लेकिन लाइटें नहीं लगीं।स्टॉप डैम: 14 लाख 50 हज़ार की लागत से बने डैम में भारी अनियमितता और पानी न रुकने का आरोप।

ग्रामीणों ने यहाँ तक आरोप लगाया है कि सरकारी राशि का दुरुपयोग कियाप्रश्नचिह्न: ? क्या जाँच टीम इंतज़ार कर रही थी,तालाब खुदवाने का?ग्रामीणों का सवाल है कि 10 दिसंबर को गंभीर शिकायत के बावजूद, जाँच टीम को गाँव पहुँचने में चार दिन क्यों लगे, और क्या टीम यह जानने के लिए इंतज़ार कर रही थी कि पंचायत के जिम्मेदार कागज़ों पर मौजूद कामों को ज़मीन पर कब उतारते हैं?

अब यह प्रशासन की पारदर्शिता और ईमानदारी पर निर्भर करता है कि वह इस मामले में तुरंत संज्ञान ले और न केवल भ्रष्टाचार की राशि की वसूली करे, बल्कि भ्रष्टाचार को छिपाने के लिए की गई इस कार्रवाई पर भी कठोर दंडात्मक कार्रवाई सुनिश्चित करे।

इधर, मीडिया ने ग्राम पंचायत सचिव ओमप्रकाश गुर्जर से उनका पक्ष जानने के लिए कॉल किया तो उन्होंने कॉल रिसीव नहीं किया।

*क्या कहते हैं जिम्मेदार-*आपके द्वारा मामला संज्ञान में लाया गया है मैं दिखवाता हूं।सिद्धार्थ जैन,जिला कलेक्टर हरदा

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