जनता के या सिर्फ कांग्रेस के विधायक चुनाव से पहले कोई भी नेता किसी भी पार्टी का हो सकता है लेकिन चुनाव जीतने के बाद वह नेता पूरी विधानसभा या संसदीय क्षेत्र का होता है ।
वो नेता जिसने वोट दिया उकसा भी होता है । और जिसने वोट नहीं दिया उसका भी होता है । उस नेता को सभी लोगों के काम करने होते है चाहे वह विपक्षी दल का ही काम क्यों ना हो ।
राहुल गांधी की मोहब्बत की दुकान
चुनाव से पहले राहुल गांधी ने खूब मोहब्बत की दुकान चलाई थी और कहा गया था की हम सबसे प्रेम करते है । उन सभी में तो rss भी आती है और RSS देश का वह संगठन है जिसकी जरूरत कांग्रेस को भी पड़ी
प्रमुख उदाहरण:
1984 के चुनाव: 1984 के लोकसभा चुनाव से ठीक पहले, राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) ने कांग्रेस को अप्रत्यक्ष समर्थन दिया था, जिसमें RSS के विचारक नानाजी देशमुख ने ‘हाथ’ (कांग्रेस का चुनाव चिह्न) पर मुहर लगाने की बात कही थी, भले ही BJP का गठन हो चुका था।
1962 का भारत-चीन युद्ध: इस दौरान कांग्रेस ने RSS से मदद मांगी थी, जैसा कि कुछ रिपोर्टों में बताया गया है।
व्यक्तिगत संबंध: संघ के संस्थापक डॉ. हेडगेवार के कांग्रेस नेता मदन मोहन मालवीय से घनिष्ठ संबंध थे, और मालवीय ने 1938 में एक कार्यक्रम में RSS के राष्ट्र-निर्माण के काम की प्रशंसा की थी।
RSS देश का वह संगठन ने जिसने हमेशा से देश हित की बात कही है ।
अभी कुछ दिन पहले कांग्रेस के प्रवक्ता द्वारा कांग्रेस के विधायक को सिर्फ इसलिए नोटिस दे दिया गया । क्योंकि वह सिर्फ RSS द्वारा आयोजित हिन्दू सम्मेलन में जाकर बैठ गए थे ।
कांग्रेस पार्टी को यह भ्रम है की कांग्रेस सिर्फ अपने बल पर चुनाव जीती है ।
बीजेपी के तत्कालीन विधायक संजय से नाराजगी के कारण ही कांग्रेस ने बहुत कम अंतर जीत हासिल की
इसी कारण बीजेपी के ही वोटरों ने कांग्रेस विधायक को वोट किया । गोपनीय सूत्रों की माने तो बीजेपी और RSS के लोग तत्कालीन विधायक की कार्यशैली से काफी नाराज थे । इसी के फलस्वरूप कांग्रेस विधायक ने जीत दर्ज की । अब भैया टिमरनी विधायक के लिए पूरा विधानसभा ही परिवार है । आप ही बताए टिमरनी विधायक की जीत का श्रेय किसे देंगे ?
