हंडिया/हरदा: हंडिया तहसील में 27 जनवरी को हुई भीषण ओलावृष्टि के बाद सर्वे रिपोर्ट सार्वजनिक न होने से उपजा किसानों का गुस्सा आज फूट पड़ा। पूर्व घोषित कार्यक्रम के अनुसार, एक दर्जन से अधिक गांवों में पुतला दहन की तैयारी थी, लेकिन प्रशासनिक हस्तक्षेप और 48 घंटे के भीतर सर्वे सूची देने के आश्वासन के बाद आम किसान यूनियन ने आंदोलन को फिलहाल टाल दिया है।
घटनाक्रम की पृष्ठभूमि:विगत 12 फरवरी को आम किसान यूनियन ने तहसीलदार को ज्ञापन सौंपकर चेतावनी दी थी कि आपदा के दो सप्ताह बाद भी सर्वे रिपोर्ट सार्वजनिक नहीं की गई है। यूनियन के पवन बिश्नोई और स्वामी संतोष भारती ने स्पष्ट किया था कि यदि प्रशासन ने पारदर्शिता नहीं दिखाई, तो मुख्यमंत्री और राजस्व मंत्री का पुतला दहन किया जाएगा।
आज जब डोमरी सहित अन्य गांवों में किसान पुतला दहन की तैयारी कर रहे थे, तभी मौके पर हंडिया टी.आई. कवरेती पहुंचे। उन्होंने किसानों की जायज मांगों को देखते हुए तत्काल हंडिया तहसीलदार एवं एसडीएम (SDM) से फोन पर चर्चा की। प्रशासन की ओर से आश्वासन दिया गया कि अगले 2 दिनों के भीतर ओलावृष्टि सर्वे की रिपोर्ट/सूची ग्राम पंचायतों में चस्पा कर दी जाएगी।
प्रशासनिक आश्वासन के बाद आम किसान यूनियन की टीम और उपस्थित सैकड़ों किसानों ने पुतला दहन कार्यक्रम को स्थगित करने का निर्णय लिया। यूनियन पदाधिकारियों ने साफ कहा है कि यह केवल स्थगन है। यदि 2 दिन के भीतर सर्वे सूची सार्वजनिक नहीं की गई और छूटे हुए किसानों का दोबारा निष्पक्ष सर्वे नहीं हुआ, तो समूचे क्षेत्र में उग्र आंदोलन पुनः शुरू किया जाएगा।
इस दौरान डोमरी में रामजीवन बिश्नोई, पवन झूरिया, मनोज, जाडू, भाईलाल सहित बड़ी संख्या में किसान मौजूद रहे।
