संवाददाता अनिल मालवीय सिराली
सिराली।हरदा जिले कि नगर परिषद सिराली द्वारा प्रस्तावित सामुदायिक शौचालय कॉम्प्लेक्स निर्माण अब गंभीर सवालों के घेरे में आ गया है। जिस स्थान पर यह निर्माण किया जा रहा है, वहीं नगर का सबसे पुराना और प्रमुख बोर स्थित है, जो लगभग 75 प्रतिशत आबादी को पेयजल उपलब्ध कराता है।
ऐसे महत्वपूर्ण जल स्रोत के पास शौचालय निर्माण करना जनस्वास्थ्य के साथ सीधा जोखिम माना जा रहा है।
सबसे बड़ा सवाल यह उठ रहा है कि क्या नगर परिषद ने इंदौर के चर्चित *भगीरथपुरा* जल कांड से कोई सबक लिया है या नहीं। उस घटना में पेयजल में सीवर का पानी मिल जाने से कई निर्दोष लोगों की जान चली गई और बड़ी संख्या में लोग गंभीर रूप से बीमार हो गए थे।
जांच में सामने आया था कि ड्रेनेज और शौचालय का दूषित पानी पेयजल सप्लाई में मिल गया था, जो एक बड़ी प्रशासनिक लापरवाही का परिणाम था।
सिराली में भी बन रही वैसी ही स्थितिसिराली में प्रस्तावित निर्माण को लेकर भी ठीक वैसे ही हालात बनते दिखाई दे रहे हैं—नगर के प्रमुख पेयजल स्रोत (बोर) के समीप निर्माणभविष्य में सेप्टिक टैंक या ड्रेनेज रिसाव की आशंकाभूजल के दूषित होने का सीधा खतरा।
यदि किसी भी प्रकार की तकनीकी चूक होती है, तो यह स्थिति डायरिया, उल्टी-दस्त और अन्य जलजनित बीमारियों के फैलाव का कारण बन सकती है।
जनता के स्वास्थ्य से समझौता?यह कोई साधारण स्थल नहीं, बल्कि पूरे नगर की जल जीवन रेखा है। ऐसे में यहां शौचालय निर्माण का निर्णय कई गंभीर प्रश्न खड़े करता है—क्या वैकल्पिक स्थानों का सर्वे नहीं किया गया?
क्या जल स्रोत की सुरक्षा को नजरअंदाज किया गया?
क्या संभावित खतरे को जानते हुए भी यह निर्णय लिया गया?
जनहित में उठी मांगनगर के जागरूक नागरिकों द्वारा मांग की जा रही है कि—इस निर्माण कार्य को तत्काल रोका जाएविशेषज्ञों से तकनीकी जांच करवाई जाएजल स्रोत से दूर सुरक्षित स्थान पर निर्माण किया जाए।
निष्कर्षइंदौर का भगीरथपुरा कांड यह स्पष्ट कर चुका है कि छोटी सी लापरवाही भी बड़े हादसे में बदल सकती है।
अब देखना यह है कि सिराली प्रशासन समय रहते सतर्क होता है या फिर किसी बड़ी त्रासदी का इंतजार किया जा रहा है।
