संवाददाता आनंद गवली सिराली
खिरकिया। शिक्षा व्यवस्था में समय की पाबंदी और शिक्षकों की उपस्थिति सुनिश्चित करने के लिए ई-अटेंडेंस जैसी डिजिटल व्यवस्था लागू की गई है, लेकिन जमीनी हकीकत इन दावों पर सवाल खड़े करती नजर आ रही है।
गोमगांव की शासकीय प्राथमिक एवं माध्यमिक शाला में निर्धारित समय से पहले ही स्कूल बंद करने की तैयारी का मामला सामने आया है।
यहां दर्ज 149 छात्र-छात्राओं की पढ़ाई को लेकर गंभीर सवाल खड़े हो गए हैं।जानकारी के अनुसार गोमगांव की प्राथमिक शाला में 72 विद्यार्थी, जबकि माध्यमिक शाला में 77 विद्यार्थी दर्ज हैं। यानी दोनों विद्यालयों में कुल 149 बच्चे अध्ययनरत हैं। आरोप है कि स्कूल में निर्धारित समय पूरा होने से पहले ही बच्चों को घर भेजने की तैयारी शुरू कर दी गई थी।
4:20 बजे ही ताला लगाने की तैयारीबताया गया कि शाम करीब 4:20 बजे स्कूल परिसर में छुट्टी का माहौल नजर आया। शासकीय माध्यमिक शाला में पदस्थ कुल 6 शिक्षकों में से 3 शिक्षक निर्धारित समय से पहले ही स्कूल से गायब बताए गए।
वहीं मौजूद शिक्षक बच्चों को समय से पहले घर भेजने के बाद स्कूल बंद करने की तैयारी में थे। इसी दौरान मीडिया टीम मौके पर पहुंच गई। कैमरा देखकर स्कूल में मौजूद शिक्षकों के कदम ठिठक गए और ताला लगाने की प्रक्रिया रोक दी गई। इसके बाद शिक्षक स्कूल परिसर में ही रुक गए।
ई-अटेंडेंस पर भी उठे सवाल मामले का सबसे गंभीर पहलू ई-अटेंडेंस व्यवस्था को लेकर सामने आ रहा है। सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार कुछ शिक्षक सुबह ई-अटेंडेंस लगाने के बाद स्कूल परिसर से बाहर दिखाई देते हैं और स्कूल का निर्धारित समय समाप्त होने के आसपास दोबारा ई-अटेंडेंस लगाने के लिए पहुंचते हैं।
यदि यह जानकारी जांच में सही पाई जाती है तो यह डिजिटल उपस्थिति व्यवस्था की निगरानी पर भी गंभीर सवाल खड़े करेगी।
आखिर ई-अटेंडेंस दर्ज होने के बाद शिक्षक विद्यालय में मौजूद हैं या नहीं, इसकी वास्तविक निगरानी कौन कर रहा है?
149 बच्चों की पढ़ाई का जिम्मेदार कौन?विद्यालय में पढ़ने वाले बच्चे शिक्षा के लिए स्कूल पहुंचते हैं। ऐसे में यदि निर्धारित समय से पहले ही विद्यालय में पढ़ाई बंद कर बच्चों को घर भेज दिया जाए तो इसका सीधा असर उनकी शिक्षा पर पड़ सकता है।
खासकर ग्रामीण क्षेत्र के सरकारी स्कूलों में पढ़ने वाले बच्चों के लिए विद्यालय का प्रत्येक शिक्षण दिवस महत्वपूर्ण होता है। ग्रामीणों का कहना है कि यदि डिजिटल हाजिरी और विभागीय निगरानी के बावजूद स्कूलों में समय की ऐसी अनदेखी हो रही है, तो फिर वास्तविक स्थिति की निगरानी कैसे हो रही है, यह जांच का विषय है।
जांच हुई तो सामने आ सकती है पूरी तस्वीरमामले में यह भी जांच का विषय है कि, संबंधित शिक्षकों ने किस समय विद्यालय में उपस्थिति दर्ज की विद्यालय में वास्तविक रूप से कितने समय मौजूद रहे और निर्धारित छुट्टी के समय से पहले बच्चों को किसके निर्देश पर घर भेजा गया।
यदि मौके की स्थिति और ई-अटेंडेंस रिकॉर्ड का मिलान किया जाए तो वास्तविकता सामने आ सकती है। जरूरत इस बात की है कि विभाग केवल डिजिटल उपस्थिति के आंकड़ों पर निर्भर न रहे, बल्कि अचानक निरीक्षण कर विद्यालयों में शिक्षकों की वास्तविक उपस्थिति और शिक्षण कार्य की स्थिति भी जांचे।
ग्रामीणों ने कार्रवाई की उठाई मांगमामले को लेकर ग्रामीणों एवं अभिभावकों में नाराजगी बताई जा रही है। उनका कहना है कि बच्चों के भविष्य के साथ किसी भी स्तर पर लापरवाही बर्दाश्त नहीं की जानी चाहिए।
ग्रामीणों ने शिक्षा विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों से गोमगांव स्कूल का अचानक निरीक्षण कराने, ई-अटेंडेंस रिकॉर्ड की जांच करने तथा निर्धारित समय से पहले विद्यालय बंद करने के आरोपों की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है।
अब सवाल यह है कि क्या शिक्षा विभाग 149 बच्चों की पढ़ाई से जुड़े इस मामले को गंभीरता से लेकर जांच कराएगा या फिर ई-अटेंडेंस के आंकड़ों को ही वास्तविक उपस्थिति मानकर मामला ठंडे बस्ते में डाल दिया जाएगा।
*इनका कहना है**आपके द्वारा मामला संज्ञान मे आया, जांच कर नियमानुसार कार्यवाही की जायगी।**नवीन प्रहलादी, विकासखंड शिक्षा अधिकारी खिरकिया।*
