धार्मिक नगरी हंडिया में बाबा रिद्धनाथ महादेव की भव्य बारात निकली और महा आरती और महाप्रसादी का भव्य कार्यक्रम किया गया।

हंडिया। पावन नर्मदा तट पर भगवान कुबेर की तपोभूमि स्थित हंडिया के प्राचीन और श्रद्धा के केंद्र बाबा रिद्धनाथ महादेव मंदिर, हंडिया से महाशिवरात्रि के पावन पर्व पर इस वर्ष भी आस्था का विराट दृश्य देखने को मिला।

पिछले 36 वर्षों से निरंतर चली आ रही परंपरा के तहत बाबा रिद्धनाथ महादेव की भव्य पालकी एवं बारात पूरे ग्राम में हर्षोल्लास और श्रद्धा के साथ निकाली गई।सुबह से ही रिद्धनाथ प्रांगण में भक्तों का सैलाब उमड़ पड़ा।

मंदिर परिसर को आकर्षक विद्युत सज्जा और फूलों से सजाया गया था। ढोल-नगाड़ों की गूंज, शंखध्वनि और “हर-हर महादेव” के जयघोष से पूरा वातावरण शिवमय हो उठा। फूलों से सुसज्जित पालकी में विराजमान बाबा रिद्धनाथ महादेव की दिव्य झांकी देखते ही बन रही थी।

इन मार्गों से निकली भव्य बारात– बारात रिद्धनाथ प्रांगण से प्रारंभ होकर लोधी मोहल्ला, किल्ला मोहल्ला, चौपाटी, खेड़ापति हनुमान मंदिर मार्ग से होते हुए आगे बढ़ी। जगह-जगह ग्रामवासियों ने पुष्पवर्षा कर बाबा का स्वागत किया और आरती उतारी। श्रद्धालु भक्ति गीतों पर झूमते नजर आए, महिलाओं ने मंगल गीत गाकर माहौल को और अधिक आध्यात्मिक बना दिया।

वापसी में बारात चौपाटी से अग्रवाल मोहल्ला मार्ग से होती हुई पुनः रिद्धनाथ प्रांगण पहुंची, जहां भव्य समापन हुआ। पूरे आयोजन में ग्राम के युवा, बुजुर्ग, महिलाएं और बच्चे बड़ी संख्या में शामिल हुए। गांव का हर कोना शिवभक्ति में सराबोर दिखाई दिया।

*36 वर्षों की अटूट परंपरा*ग्रामवासियों ने बताया कि यह पालकी और बारात पिछले 36 वर्षों से हर महाशिवरात्रि पर निरंतर निकाली जाती है। यह आयोजन केवल धार्मिक परंपरा नहीं, बल्कि गांव की एकता, सांस्कृतिक धरोहर और सामाजिक समरसता का प्रतीक बन चुका है।

महा आरती और प्रसाद वितरण– बारात के समापन के पश्चात रिद्धनाथ प्रांगण में बाबा रिद्धनाथ महादेव की भव्य महा आरती की गई। दीपों की पंक्तियों और घंटों की गूंज के बीच भक्तों ने भाव-विभोर होकर आरती में सहभागिता की।

इसके पश्चात श्रद्धालुओं को प्रसाद वितरण किया गया।नर्मदा तट की पावन वादियों में महाशिवरात्रि का यह दिव्य आयोजन मानो शिव विवाह की जीवंत झांकी प्रस्तुत कर रहा था। आस्था, उल्लास और परंपरा का यह अद्भुत संगम हंडिया की पहचान और गौरव का प्रतीक बन चुका है।

*नर्मदा तट पर बसे हंडिया की यह ऐतिहासिक शिव परंपरा आने वाली पीढ़ियों को भी भक्ति और एकता का संदेश देती रहेगी*

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