पूर्व मंत्री रहे कमल पटेल के सतत प्रयासों से हंडिया–नेमावर बने तीर्थ स्थल, शराब–मांस बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध ।

हंडिया। मां नर्मदा की पावन धरा पर आस्था और संस्कृति को बड़ा सम्मान देते हुए मध्यप्रदेश शासन ने ऐतिहासिक निर्णय लिया है। पूर्व कैबिनेट मंत्री कमल पटेल की मांग पर हंडिया और नेमावर को आधिकारिक रूप से तीर्थ स्थल घोषित कर दिया गया है। साथ ही मां नर्मदा तट पर दोनों स्थानों पर शराब एवं मांस की बिक्री पर पूर्णतः प्रतिबंध लागू कर दिया गया है।

*शासन का आधिकारिक पत्र जारी*मध्यप्रदेश शासन के धार्मिक न्यास एवं धर्मस्व विभाग (मंत्रालय वल्लभ भवन) द्वारा पत्र क्रमांक आरटीई/0199/2025/68 के माध्यम से यह निर्णय सार्वजनिक किया गया।

पत्र में उल्लेख है कि पूर्व मंत्री कमल पटेल द्वारा 04 फरवरी 2025 को प्रेषित पत्र (क्रमांक 425/2025) के संदर्भ में कलेक्टर हरदा की अनुशंसा के आधार पर—

*हंडिया को तीर्थस्थल घोषित किया गया*तीर्थ सूची में शामिल कर लिया गया।परिक्रमा पथ निर्माण की प्रक्रिया सुनिश्चित की गई।हंडिया एवं नेमावर के नर्मदा तट पर शराब और मांस की बिक्री पूर्णतः प्रतिबंधित की गई।

इस आदेश पर अवर सचिव श्रीमती अन्नू भलावी द्वारा 21 जनवरी 2026 को डिजिटल हस्ताक्षर किए गए। *नर्मदा तट की आस्था को मिला सम्मान*हंडिया और नेमावर सदियों से मां नर्मदा की तपोभूमि और धार्मिक आस्था के प्रमुख केंद्र रहे हैं। विशेषकर नर्मदा परिक्रमा करने वाले साधु-संतों एवं श्रद्धालुओं के लिए यह स्थल अत्यंत महत्वपूर्ण माना जाता है। तीर्थ स्थल का दर्जा मिलने से इन क्षेत्रों की धार्मिक गरिमा और बढ़ेगी।

*सामाजिक एवं धार्मिक वातावरण होगा सुदृढ़*शराब और मांस बिक्री पर पूर्ण प्रतिबंध लागू होने से तीर्थ क्षेत्र की पवित्रता कायम रहेगी। स्थानीय संत समाज और श्रद्धालुओं ने इस निर्णय का स्वागत करते हुए इसे “नर्मदा भक्तों की जीत” बताया है।

*परिक्रमा पथ निर्माण से बढ़ेगा पर्यटन*परिक्रमा पथ निर्माण से तीर्थयात्रियों को सुविधा मिलेगी और धार्मिक पर्यटन को नई दिशा मिलेगी। इससे स्थानीय रोजगार और व्यापार को भी बढ़ावा मिलने की संभावना है।

*क्षेत्र में खुशी की लहर*घोषणा के बाद हंडिया और नेमावर क्षेत्र में हर्ष का वातावरण है। श्रद्धालुओं और सामाजिक संगठनों ने इसे ऐतिहासिक निर्णय बताते हुए शासन एवं कमल पटेल का आभार व्यक्त किया है।यह निर्णय न केवल धार्मिक दृष्टि से महत्वपूर्ण है, बल्कि सांस्कृतिक विरासत के संरक्षण की दिशा में भी एक बड़ा कदम माना जा रहा है।

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