उच्च न्यायालय के आदेश पर हरदा में पदस्थ शासकीय सेवक की टिप्पणी, इंस्टाग्राम पर लिखी टीप

हरदा । माननीय उच्च न्यायालय के एक आदेश पर हरदा के पुलिस विभाग में पदस्थ एक सब इंस्पेक्टर ने टिप्पणी की है। सरकारी सेवक ने नसीहत देने के अंदाज में माननीय न्यायालय के आदेश पर पर टिप्पणी की है।

उक्त सरकारी सेवक ने बाकायदा उच्च न्यायालय के आदेश संबंधी खबर की कटिंग को चस्पा करते हुए इंस्टाग्राम पर पुलिस विभाग का पक्ष लेते हुए कोर्ट को नसीहत देने के अंदाज में टिप्पणी की है।

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उच्च न्यायालय के आदेश पर हरदा में पदस्थ शासकीय सेवक की टिप्पणी, इंस्टाग्राम पर लिखी टीप 3

इधर, कानून के जानकार इसे न्यायालय की अवमानना बता रहे हैं। उनके मतानुसार विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों को टिप्पणीकार सब इंस्पेक्टर पर तत्काल कार्रवाई करना चाहिए।

क्योंकि पुलिस रेगुलेशन एक्ट का उल्लंघन कर इन्होंने माननीय उच्च न्यायालय के आदेश की खबर पर सोशल मीडिया पर सार्वजनिक टिप्पणी की है। क्या था पोस्ट व टिप्पणी -हाइकोर्ट की अनोखी सजा, टीआई को 2 माह में लगाने होंगे 1000 फलदार पौधे- सालभर करनी होगी देखभाल, कोर्ट को भेजनी होगी

रिपोर्टराजधानी के एक प्रमुख दैनिक में इस आशय की हेडिंग से खबर प्रकाशित हुई थी। इसमें नाबालिग से दुराचार मामले में पीड़िता को नोटिस तामील न कराने पर टीआई को 1000 पौधे लगाने की अनोखी सजा सुनाई थी।

ये आदेश जस्टिस विवेक कुमार अग्रवाल और जस्टिस अवनींद्र कुमार सिंह की बेंच ने दिया था। इस खबर कटिंग को इंस्टाग्राम पर पोस्ट कर टिप्पणी करते हुए अनिल गुर्जर ने लिखा – सही है ऐसा ही तारीख पर तारीख बढ़ने पर हर तारीख पर माननीय खुद भी अगर एक भी पौधा लगाए तो इंडिया अमेजन फॉरेस्ट को पीछे छोड़ देगा।

ध्यान दो इस तरफ भी26 june (देखिए पोस्ट का स्क्रीनशॉट)

क्या कहना है अधिवक्ता का अनिल जाट, अधिवक्ता

– किसी भी पुलिस अधिकारी और कर्मचारी के द्वारा माननीय न्यायालय के आदेशों पर इस प्रकार का कटाक्ष नहीं किया जा सकता है।

अनिल गुर्जर का यह कृत्य मध्य प्रदेश पुलिस अधिनियम, 1961 के तहत तथा न्यायालय की अवमानना ​​अधिनियम, 1971 की धारा 12 के तहत अपराध है। जो पुलिस अधिकारी ऐ सा अपराध करता है

उसे तत्काल सेवा से बर्खास्त करते हुए, उसे सख्त से सख्त सजा दी जानी चाहिए ताकि फिर कोई व्यक्ति ऐसी हिमाकत न कर सके-अनिल जाट, अधिवक्ता हरदा

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