- कास्दे, आप कितना भी बचाओ ! पर आपकी कालाबाजारी का चिट्ठा खुल चुका है!
- यूरिया को लेकर किसानों के बीच हाहाकार क्यों मचा हुआ है ? इसको समझिए! सिर्फ एक उदाहरण से..!
- शुक्रवार को टिमरनी से पटेल कृषि सेवा केंद्र हरदा ने 445 बोरी यूरिया खाद बुलाया।
- खाद जाना था स्टॉक के अनुसार दुकान पर, ताकि दुकान से किसान खाद ले सके।
- मगर खाद पहुंचा, पटेल कृषि सेवा केंद्र का ही स्कूल है, मां शारदा विद्यापीठ छिपानेर रोड पर।
वहां पर… - इसके पीछे की कहानी… !
जब किसान दुकान पर पहुंचे, खाद लेने… तब उनको बताया जा सके, स्टॉक खत्म हो गया । - बाद में स्कूल के अस्थाई गोदाम से कालाबाजारी में खाद को बेचा जा सके।
- जानकारी पत्रकारों को मिली!
वे स्कूल के उस गोदाम पर पहुंच गए!
जहां खाद खाली किया गया था।
सवाल-जवाब करने लगे ! - पटेल कृषि सेवा केंद्र के संचालक मौके पर मौजूद है।
- पत्रकार वीडियो बनाने लगे।
- तब दुकानदार ने एक पत्रकार मित्र का मोबाइल छुड़ा लिया!
- वीडियो डिलीट करने लगे।
पत्रकारों ने दूसरे मोबाइल से वीडियो बनाना शुरू कर दिया।
पत्रकार कपिल शर्मा भी सीधे भीड़ गए । पीछे नहीं हटे।
उपसंचालक कृषि जेएल कास्दे को फोन लगाया।
कास्दे ने टीम भेजी ।
संबंधित के कागजात जब्त किए।
शासकीय कार्रवाई शुरू होने पर, पटेल कृषि सेवा केंद्र के संचालक ने मोबाइल पत्रकारों को वापस दिया।
- बाद में कास्दे से पॉइंट टू पॉइंट बात हुई। डीडीए कास्दे बोलने लगे- उनके यहां गोदाम की कमी थी, तब स्कूल में रखा है।
उपसंचालक कृषि कास्दे वही भाषा बोल रहे हैं, जो मिली भगत की है।
- पत्रकारों ने कलेक्टर सिद्धार्थ जैन से बात की।
तब,संबंधित दुकानदार को नोटिस जारी करवा दिया है ।
जवाब आने पर दुकानदार के विरुद्ध कार्य की जाएगी। - सवाल उपसंचालक कृषि श्री कास्दे का है,
जिनके संरक्षण में ही खाद कालाबाजारी का खेल चल रहा है ।
दुकानदारों से इनके अघोषित घनिष्ठ संबंध क्यो है ?
जिसने किसानों को परेशानी में डाल रखा है। - जब भी कालाबाजारी पर किसान और पत्रकार सवाल उठाते हैं,
डीडीए कास्दे दुकानदारों का पक्ष लेना शुरू कर देते हैं !
क्या कारण है ?
खुलासा कर दीजिए ! - जबकि इनका दायित्व बनता है, किसानों के हितों की बात करें।
- और सिर्फ कास्दे दे ही क्यों ?
कास्दे को इतना बड़ा संरक्षण कहां से मिल रहा है!
सवाल यह भी उठना चाहिए है ! - पिछले 3 महीने से हरदा जिले में किसान दर्जनों धरने दे चुके हैं ।
कालाबाजारी के खिलाफ।
खाद न मिलने के खिलाफ।
कास्दे के चेहरे पर शिकन तक नहीं आई। - उपसंचालक कृषि के पद पर, कास्दे जैसे अधिकारी बैठकर दुकानदारों की भाषा बोलते रहेंगे, तब तक कालाबाजारी रुकने वाली नहीं है !
खाद की किल्लत में सुधार नहीं आएगा ! - मामले में उपसंचालक कृषि कास्दे को भी नोटिस जारी होना चाहिए।
विषय को कलेक्टर के साथ-साथ कमिश्नर नर्मदापुरम संभाग को भी गंभीरता से लेने की जरूरत है।
रामविलास कैरवार पत्रकार हरदा
