संवाददाता मिथलेश वैष्णव
हरदा (मध्य प्रदेश)आज दिनांक 13 अप्रैल 2026 को कृषि उपज मंडी स्थित ‘कृषक विश्राम गृह’ में हरदा जिले के समस्त किसान संगठनों के सदस्यों एवं प्रबुद्ध किसानों की एक महत्वपूर्ण बैठक आयोजित की गई। इस बैठक में किसानों की वर्तमान ज्वलंत समस्याओं पर विस्तृत चर्चा की गई और सर्वसम्मति से “किसान क्रांति आंदोलन 2.0” का बिगुल फूँक दिया गया।
बैठक में किसानों ने अपनी समस्याओं को लेकर 8 सूत्रीय मांग पत्र तैयार किया है:समस्त कृषि उपजों (गेहूँ, मक्का, मूँग) की न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) पर अधिकतम खरीदी सुनिश्चित की जाए।जिले में उपज को आधार मानकर समस्त कृषि उपज की तुलाई ‘बड़े प्लेट कांटे’ से की जाए।
जिन किसानों ने MSP से कम भाव पर अपनी उपज बेची है, उन्हें भाव के अंतर की राशि का भुगतान किया जाए।MSP पर खरीदी में देरी के कारण किसानों के 0% ब्याज पर ऋण जमा करने की अवधि बढ़ाई जाए।नरवाई जलाने के कारण किसानों पर की गई प्रशासनिक कार्रवाई तत्काल निरस्त की जाए।E-विकास प्रणाली में खाद की मात्रा का विकल्प दिया जाए और रासायनिक उर्वरकों की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित की जाए।
चने की खरीदी में बायोमेट्रिक पहचान की अनिवार्यता समाप्त कर मोबाइल OTP से वेरिफिकेशन किया जाए।शहीद इलाप और मोरंड-गंजाल सिंचाई परियोजना से वंचित गांवों को तत्काल योजना में शामिल किया जाए।
आंदोलन की चेतावनी और प्रशासन का आश्वासनचर्चा के उपरांत किसान संगठनों ने निर्णय लिया है कि यदि इन मांगों पर उचित कार्रवाई नहीं होती है, तो 28 अप्रैल 2026 को दोपहर 11 बजे जिले के समस्त किसान अपने-अपने ट्रैक्टरों के साथ हरदा मुख्यालय की ओर कूच करेंगे और वहां ‘डेरा डालो-घेरा डालो’ आंदोलन शुरू करेंगे।
बैठक स्थल पर सहायक आयुक्त सहकारिता, श्री भदौरिया जी ने पहुँचकर किसानों को आश्वासन दिया कि बायोमेट्रिक थंब की समस्या और स्लॉट बुकिंग में आ रही दिक्कतों का निराकरण 2 दिन के भीतर कर दिया जाएगा। साथ ही, खरीदी केंद्रों पर बड़े प्लेट कांटे से तुलाई शीघ्र प्रारंभ की जाएगी।
किसानों ने स्पष्ट किया है कि जब तक सभी मांगों का स्थायी निराकरण नहीं होता, आंदोलन की तैयारी जारी रहेगी। इस बैठक में जिले के भारी संख्या में किसान और संगठन प्रतिनिधि उपस्थित रहे।


