हंडिया। विगत दिनों कुछ मनचलों लड़कों द्वारा ग्राम में सियार के आ जाने से उसकी जान ले ली गई उसके बाद भी वन विभाग द्वारा किसी प्रकार से कोई कार्यवाही नहीं की गई जबकि वन विभाग के लोगों ने मृत सियार को लेकर गए उसके बाद आज तक उसकी किसी भी प्रकार से कोई जानकारी नहीं दी गई ।

अगर ऐसा ही चलता रहा तो जल्द ही वन जीव क्षेत्र से खत्म हों सकते हैं ।
वन जीवो को मरने बालों के संरक्षण में हे हंडिया वन विभाग के अधिकारी।

जबकि वन्यजीव सियार को मारने पर वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 की धारा 9 के तहत प्रतिबंध और धारा 51 के तहत दंड का प्रावधान है, जिसमें सियार को मारना एक अवैध शिकार माना जाता है और तीन साल से सात साल तक की कैद तथा ₹25,000 तक का जुर्माना हो सकता है।

वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के अनुसार:धारा 9 (शिकार पर प्रतिबंध): यह धारा किसी भी संरक्षित जानवर का शिकार करने या उसकी हत्या करने पर रोक लगाती है, और सियार भी इस अधिनियम के अंतर्गत संरक्षित जीवों की श्रेणी में आता है।
धारा 51 (दंड): इस धारा के अनुसार, वन्यजीव अधिनियम के किसी भी प्रावधान का उल्लंघन करने पर दंड का प्रावधान है।
यदि किसी संरक्षित जीव जैसे सियार को मारा जाता है, तो इसके लिए तीन साल से सात साल तक की कैद और ₹25,000 तक का जुर्माना हो सकता है। इसलिए, यदि कोई व्यक्ति वन्यजीव सियार को मारता है, तो यह वन्यजीव (संरक्षण) अधिनियम, 1972 के तहत एक दंडनीय अपराध है।
इन सभी नियमो के बाद भी आज तक सियार को मरने बालों के ऊपर कोई कार्यवाही नहीं की गई ओर मामले को दावा दिया गया है।
