रामविलास कैरवार
पत्रकार, हरदा
सात घंटे।
70 के लगभग छोटे-छोटे मंच सजे।
लगभग 5000 से अधिक लोगों का मिलना हुआ।
बिना किसी सभा के… और बिना किसी जलसे के…
कार्य …सिर्फ…
एक पौधा लगाना..!
खिरकिया के बावड़िया गांव में…
और दो जगह श्रद्वाजलि ..

हरदा का दौरा पूर्ण होने पर, आपने फेसबुक अकाउंट पर लिखा है।
मैं अभीभूत हूं हरदा की जनता का प्यार पाकर!
मामा आप लोकप्रिय थे!
और लोकप्रिय हो..
मध्य प्रदेश में आपका कोई सानी नहीं…
खासकर के बीजेपी में..
लोकप्रियता के पैमाने पर आपके सामने कोई नहीं टिक पाता …
इतना लचीलापन, लाएंगे कहां से…?

फिर भी आप समय-समय पर लोकप्रियता की नव्ज टटोलने के लिए मध्य प्रदेश के किसी भी कोने में निकल जाते हो… जैसे आज हरदा आए थे …
मुख्यमंत्री पद से हटे हुए काफी दिन हो गए…
फिर भी पब्लिक अगर मामा-माम कहकर बुलाने लगती है।
लिपटने लगती है..
तब मान कर चलिए, आपको ट्रेडमार्क मिल चुका है।
ऐसा ट्रेडमार्क अभी तक मध्य प्रदेश में किसी भी नेता को नहीं मिला !
जहां भी जाओगे, वहां भांजे-भांजिया और लाडली बहने आपको घेर लेंगे।
जो हरदा में देखने को मिला है।
लेकिन…
आपका यूं निकलना, मध्य प्रदेश सरकार के लिए मुसीबत पैदा कर रहा है।
मध्य प्रदेश के किसी भी हिस्से में निकल जाने से मोहन सरकार का टेंपरेचर बढ़ जाता है।
आप यह क्यों नहीं मानते !
मोहन यादव मुख्यमंत्री होने के बावजूद अभी तक स्थापित नहीं हो पाए है !
सिर्फ इसलिए, कि प्रदेश की जनता आपको नहीं भूल पा रही है।
जनता से आप दूरियां बढ़ाओगे, तब मध्य प्रदेश में मोहन यादव सरकार स्थापित हो सकेगी !
अगर जनता से गेप नहीं रखोगे, तब मोहन यादव सरकार स्थापित नहीं हो पाएगी !
थोड़ा रहम कीजिए…
आज,,जनसंपर्क से जो खबर आई है, उसमें सिर्फ इतना ही जिक्र है, शिवराज सिंह चौहान ने बावड़िया गांव में पौधारोपण किया ।
दो परिवार में शोक संवेदना व्यक्त की है।
और खबर समाप्त… !
लेकिन आपकी फेसबुक आईडी से चार लाइन लिखी हुई पढ़ने को मिली है!
मैं अभीभूत हूं, हरदा की जनता का लाड़, प्यार, दुलार, पाकर…
आपका काम तो हो गया !
लोकप्रियता,टटोलने का…।
लेकिन मोहन यादव सरकार की पीड़ा
बढ़ गई ही होगी ! समझिए ..
मध्य प्रदेश की जनता के दिलों में यूं राज करते रहेंगे, तब मोहन यादव को मुख्यमंत्री कौन मानेगा ?
मध्य प्रदेश में वैसे भी आपकी टक्कर में कोई नेता नहीं है !
मुख्यमंत्री की कुर्सी पर नए नवेले नेता को बैठाया है।
वह अभी तक स्थापित नहीं हो पाया है !
यूं ,,तो केन्द्र के सपने पूरे नहीं हो पाएंगे !
जो मध्य प्रदेश में नया नेता पैदा करने की कोशिश कर रहे थे ।
वैसे भी 18 साल के मुख्यमंत्री के कार्यकाल में आपने कोई भी नया नेता मध्य प्रदेश में, आपकी टक्कर में, पैदा नहीं होने दिया।
जब -जब किसी ने कोशिश की, आपसे आगे निकलने की…!
आपने, मासूमियत से उसके पैर के नीचे की जाजम खींच ली।
इसमें दो नाम मुझे याद आते हैं ।
पहला प्रयास कैलाश विजयवर्गी ने किया था, राष्ट्रीय महामंत्री बनने के बाद…
और दूसरा प्रयास, ऑपरेशन लोटस का सारथी बनकर नरोत्तम मिश्रा ने किया था ।
लेकिन दोनों को फेल कर दिया, आपने..
सिंधिया समर्थकों के सहयोग से जब सरकार बनने की बारी आई, तब आपके अलावा कोई विकल्प नहीं था।
मुख्यमंत्री आपको ही बनाना पड़ा..
नरोत्तम मिश्रा को तो घर बैठाने जैसे हालात कर दिए हैं। मध्य प्रदेश भाजपा संगठन का अध्यक्ष नहीं बनने दिया!
वर्तमान में मोहन यादव की बात करें,तो
हेलीकॉप्टर से उड़ लेने से लोकप्रियता नहीं आ जाती…
मुख्यमंत्री के आसपास जो भीड़ दिख रही है, वह मुख्यमंत्री के पद के कारण है। पावर हटा दो, तो कुछ भी नजर नहीं आएगा !
हरदा में पत्रकारों के समक्ष, सोयाबीन समर्थन मूल्य खरीदी पर बयान देकर,आपने मोहन यादव सरकार की मुसीबत फिर बढ़ा दी है।
