हरदा। मध्य प्रदेश में एक बार फिर बड़े किसान आंदोलन की सुगबुगाहत तेज हो गई है। हरदा जिले से शुरू हुआ ‘किसान क्रांति ट्रैक्टर आंदोलन’ अब पूरे प्रदेश में फैलता जा रहा है।
खास बात यह है कि इस बार यह आंदोलन किसी राजनीतिक दल के बैनर तले नहीं, बल्कि खुद किसानों द्वारा स्वेच्छा से लड़ा जा रहा है।
आंदोलन को सफल बनाने के लिए किसान नेता और कार्यकर्ता हरदा, टिमरनी और खिरकिया की मंडियों सहित गांवों, शादियों और मंदिरों में जाकर किसानों से संपर्क कर रहे हैं।
आज श्री गुरु जंभेश्वर भगवान मंदिर नीमगांव में संत श्री आत्मानंद महाराज ने भी किसानों से अनिश्चितकाल के लिए हरदा पहुंचने का आह्वान किया है। किसानों ने स्पष्ट कर दिया है कि इस बार वे केवल ज्ञापन देकर घर नहीं लौटेंगे।
28 अप्रैल से शुरू होने वाला यह आंदोलन अनिश्चितकालीन होगा, जिसमें किसान जिला स्तर पर ही डेरा डालेंगे। आंदोलन की गंभीरता का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि किसानों ने ट्रैक्टर-ट्रॉलियों में आटा, दाल, बर्तन, लकड़ी, कंडे और पानी के टैंकर जैसी जरूरी वस्तुएं अभी से जुटा ली हैं।
बड़ी भीड़ और अन्य जिलों के किसानों के शामिल होने की संभावना को देखते हुए प्रशासन सकते में है। अधिकारियों द्वारा बुलाई गई समन्वय बैठक को किसानों ने ठुकरा दिया है और अपनी रणनीति को गुप्त रखा है।
आज मंडियों और वैवाहिक कार्यक्रमों में मनोज विश्नोई, केदार सिरोही, पंकज बेनिवाल, पवन विश्नोई, मनोज अडिंग, शोवित सिंह राजपूत, लोकेश गोदारा और रोहित करोड़े सहित अनेक साथियों ने किसानों को आंदोलन का निमंत्रण दिया। किसानों ने एकजुट होकर संकल्प लिया है कि वे अपनी मांगों को लेकर पीछे नहीं हटेंगे।
