हरदा ।जिले से मीडिया को कवरेज से रोकना लोकतंत्र के चौथे स्तंभ की स्वतंत्रता और सम्मान का सवाल, पत्रकारों ने एकजुट होकर जताया विरोध….लोकतंत्र में पत्रकारिता केवल समाचार संकलन और प्रसारण का माध्यम नहीं, बल्कि जनता की आवाज को शासन-प्रशासन तक पहुंचाने और सरकार की योजनाओं एवं गतिविधियों को जनता के सामने प्रस्तुत करने का महत्वपूर्ण दायित्व भी निभाती है।
पत्रकार जनता और प्रशासन के बीच एक सेतु का काम करते हैं। ऐसे में जब पत्रकारों को अपने पेशेवर दायित्वों के निर्वहन के दौरान बार-बार बाधाओं का सामना करना पड़े, तो यह केवल मीडिया से जुड़ा विषय नहीं रह जाता, बल्कि लोकतांत्रिक व्यवस्था में पारदर्शिता, संवाद और पत्रकारों के सम्मान का सवाल बन जाता है।
हरदा जिले में मुख्यमंत्री के दौरे के दौरान मीडिया कवरेज को लेकर सामने आए घटनाक्रम के बाद जिला पत्रकारों ने जिला प्रशासन के रवैये के विरोध में बहिष्कार का निर्णय लिया।
पत्रकारों का कहना है कि जिले में वर्तमान कलेक्टर के कार्यकाल के दौरान मीडिया के प्रति प्रशासन का व्यवहार संतोषजनक नहीं रहा है। पत्रकारों के अनुसार, शुक्रवार को मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के दौरान भी उन्हें अलग-अलग स्थानों पर कवरेज करने से रोका गया, जिससे उनमें नाराजगी बढ़ गई।
सभी पत्रकारों साथियों के मुताबिक, जिला चिकित्सालय में मुख्यमंत्री जब बालिकाओं को चश्मे वितरित कर रहे थे, उस समय भी मीडिया प्रतिनिधियों को कवरेज के लिए अंदर जाने से रोका गया।
पत्रकारों का उद्देश्य मुख्यमंत्री के इस कार्यक्रम की तस्वीरें और वीडियो लेकर जनहित से जुड़ी खबरों को जनता तक पहुंचाना था। इसी तरह वृद्धाश्रम में मुख्यमंत्री के पहुंचने पर पत्रकार वहां मौजूद वृद्धजनों के साथ उनके संवाद और आशीर्वाद लेने के संभावित दृश्य को कैमरे में कैद करना चाहते थे, ताकि इस कार्यक्रम को अपने-अपने समाचार माध्यमों के जरिए जनता के सामने प्रस्तुत कर सकें।
लेकिन यहां भी उन्हें अपनी इच्छानुसार कवरेज करने का अवसर नहीं मिल पाया।इसके बाद जिला पंचायत परिसर में मुख्यमंत्री के कार्यक्रम के दौरान भी पत्रकारों को प्रवेश संबंधी परेशानी का सामना करना पड़ा।
पत्रकारों का आरोप है कि जिला पंचायत के मुख्य द्वार पर भारी पुलिस बल तैनात था और जनसंपर्क विभाग की ओर से सुरक्षा कारणों का हवाला देते हुए उन्हें परिसर में प्रवेश करने से रोक दिया गया। पत्रकारों का कहना है कि सुरक्षा व्यवस्था का अपना महत्व है, लेकिन उसके नाम पर मीडिया प्रतिनिधियों को पूरी तरह दूर रखना उचित नहीं है।
यदि सुरक्षा संबंधी कोई प्रतिबंध था, तो उसके लिए स्पष्ट व्यवस्था और समुचित संवाद होना चाहिए था, ताकि पत्रकारों को निर्धारित नियमों के तहत कवरेज का अवसर मिल सके।पत्रकारों ने यह भी आरोप लगाया कि कुछ ऐसे लोगों को अंदर जाने दिया जा रहा था, जिन्हें वे पॉलीटिकल सामान्य कार्यकर्ता के रूप में देख रहे थे, जबकि समाचार संकलन के लिए पहुंचे पत्रकारों को परिसर में प्रवेश नहीं मिला।
पत्रकारों के अनुसार, यह स्थिति मीडिया के साथ भेदभावपूर्ण व्यवहार की आशंका पैदा करती है। उनका सवाल है कि जब पत्रकार अपने संस्थानों के लिए समाचार संकलन करने और जनता को जानकारी देने की जिम्मेदारी निभा रहे हैं, तो उनके साथ ऐसा व्यवहार क्यों किया जाना चाहिए?
इस पूरे घटनाक्रम के बाद पत्रकारों ने अपने आत्मसम्मान को प्राथमिकता देते हुए जिला प्रशासन के रवैये के विरोध में एकजुटता दिखाई।
प्रशासन की ओर से आयोजित प्रेस कॉन्फ्रेंस में भी पत्रकारों ने शामिल होना उचित नहीं समझा। उनका स्पष्ट कहना था कि यह विरोध किसी व्यक्ति विशेष से व्यक्तिगत नाराजगी का मामला नहीं, बल्कि पत्रकारिता के सम्मान, स्वतंत्रता और निष्पक्ष कामकाज से जुड़ा विषय है।
जब पत्रकारों को मुख्यमंत्री के कार्यक्रमों की कवरेज से ही दूर रखा जाएगा, तो वे जनता तक घटनाओं की वास्तविक तस्वीर कैसे पहुंचा पाएंगे?पत्रकारों का कहना है कि वे प्रशासन के विरोधी नहीं हैं। उनका काम शासन की योजनाओं, उपलब्धियों और जनहित के कार्यों को जनता तक पहुंचाना है।
साथ ही, जहां जनसमस्याएं हैं, प्रशासनिक कमियां हैं या जनता के सवाल हैं, वहां उन्हें सामने लाना भी पत्रकारिता का दायित्व है। यही कारण है कि मीडिया की भूमिका को केवल सरकारी कार्यक्रमों की तस्वीरें प्रकाशित करने तक सीमित नहीं किया जा सकता। पत्रकारों को स्वतंत्र रूप से तथ्यों का संकलन करने, सवाल पूछने और अपने संपादकीय दृष्टिकोण के अनुसार समाचार प्रस्तुत करने का अवसर मिलना चाहिए।
यह किसी पद या व्यक्ति की नहीं, पत्रकारों के सम्मान की लड़ाई हैपत्रकारों का सम्मान किसी अधिकारी की कृपा पर निर्भर नहीं होना चाहिए। प्रशासनिक पद पर बैठे अधिकारियों और जनसंपर्क विभाग की जिम्मेदारी है कि वे मीडिया के साथ समन्वय स्थापित करें, कार्यक्रमों की जानकारी समय पर उपलब्ध कराएं और सुरक्षा संबंधी नियमों के दायरे में रहते हुए निष्पक्ष कवरेज की व्यवस्था सुनिश्चित करें।
मुख्यमंत्री जैसे महत्वपूर्ण पद पर आसीन व्यक्ति के कार्यक्रमों में मीडिया की भूमिका और भी महत्वपूर्ण हो जाती है, क्योंकि इन कार्यक्रमों से जुड़ी जानकारी प्रदेश और जिले की जनता तक पहुंचाना पत्रकारों की जिम्मेदारी है।यदि सुरक्षा कारणों से किसी स्थान पर प्रवेश सीमित करना आवश्यक हो, तो प्रशासन को पहले से स्पष्ट दिशा-निर्देश तय करने चाहिए।
अधिकृत पत्रकारों के लिए प्रवेश पास, निर्धारित कवरेज स्थल और आवश्यक सुरक्षा जांच जैसी व्यवस्थाएं की जा सकती हैं। लेकिन बिना समुचित संवाद के पत्रकारों को बार-बार रोकना और उनके पेशेवर दायित्वों में बाधा उत्पन्न होना असंतोष को जन्म देता है।
हरदा के पत्रकारों का यह विरोध इसी असंतोष की अभिव्यक्ति है। पत्रकारों ने स्पष्ट किया है कि वे अपने सम्मान और स्वतंत्र पत्रकारिता के लिए एकजुट हैं और मीडिया के प्रति इस प्रकार के रवैये का विरोध आगे भी जारी रखेंगे।
उनकी मांग है कि जिला प्रशासन और जनसंपर्क विभाग अपने व्यवहार की समीक्षा करें तथा पत्रकारों के साथ सम्मानजनक और पारदर्शी संवाद की व्यवस्था सुनिश्चित करें।लोकतंत्र में प्रशासन और मीडिया एक-दूसरे के विरोधी नहीं, बल्कि अलग-अलग भूमिकाओं में जनहित के लिए काम करने वाली संस्थाएं हैं।
प्रशासन का दायित्व व्यवस्था और जनकल्याणकारी योजनाओं का क्रियान्वयन है, जबकि पत्रकारों का दायित्व उन कार्यों की वास्तविक स्थिति जनता के सामने रखना है। दोनों के बीच बेहतर समन्वय से ही जनता का विश्वास मजबूत होता है।अंततः सवाल केवल इतना है कि यदि पत्रकारों को जनता के लिए समाचार जुटाने से रोका जाएगा, तो लोकतंत्र में जवाबदेही और पारदर्शिता कैसे मजबूत होगी?
पत्रकार किसी विशेष सुविधा या विशेषाधिकार की मांग नहीं कर रहे, बल्कि अपने पेशेवर दायित्वों के निर्वहन के लिए सम्मानजनक व्यवहार और निष्पक्ष अवसर चाहते हैं।
जिला प्रशासन को चाहिए कि वह इस विरोध को टकराव के रूप में देखने के बजाय संवाद का अवसर माने और ऐसी व्यवस्था बनाए, जिसमें सुरक्षा भी बनी रहे तथा पत्रकारिता की स्वतंत्रता और सम्मान भी सुरक्षित रहें।पत्रकारों का सम्मान, स्वतंत्र पत्रकारिता का सम्मान है और स्वतंत्र पत्रकारिता ही लोकतंत्र की मजबूती का आधार है।
