बेटी ने 2 दशक पहले कुआं खोदकर बाबुल को दिया था जलस्रोत का उपहार !◆ कुएं से पानी निकालने का जज़्बा बना लेखिका की कहानी की प्रेरणा●

ये कहानी हौसले की है, जज्बे की है। गर्मी के वक़्त पानी की किल्लत से जूझ रहे 7 सदस्यीय परिवार की सबसे बड़ी बेटी ने महज 19 साल की उम्र में दो दशक पहले वो काम कर दिखाया, जो आज भी मिसाल बना हुआ है।

बात वर्ष 2006 की है। रेलवे लाइन के पास स्थित देवकालोनी की एक छोटी बस्ती जहां कच्चे मकान थे। परिवार की सबसे बड़ी बेटी नसरीन को रोज अपनी दो बहनों के साथ दूर से पानी लाना पड़ता था।एक दिन नसरीन ने ठान लिया कि कब तक ऐसी तकलीफ सहेंगे। उसने अकेले कुआं खोदने का फैसला कर लिया।सुबह से शाम तक नसरीन लगातार खुदाई करती।

शुरुआत में हाथों से मिट्टी निकाली, फिर एक कटे पेड़ को गड्ढे के ऊपर रखकर रस्सी और डलिया के सहारे मिट्टी बाहर फेंकी। इस काम में उसकी बहनें और मां पिता मदद करते। कुएं से निकली मिट्टी से बांस-खपच्ची से बने अपने कच्चे घर को सबने मिलके लीप-पोतकर रहने लायक बनाया।और 20 वें दिन, 35 फुट गहरे गड्ढे में कुदाली की चोट पड़ते ही जमीन से पानी की धार फूट पड़ी।नसरीन और उसके परिवार की मेहनत का पसीना सार्थक हो गया।

उस कच्चे कुएं से न सिर्फ उसके परिवार, बल्कि आसपास के रहवासियों की प्यास बुझने लगी।नसरीन की हौसले और जज्बे से जुड़ी इस कहानी को माह नवम्बर वर्ष 2006 में प्रतिष्ठित दैनिक अख़बार में प्रमुख खबर के रूप में स्थान मिला।

■ अनवरत चल रहा है जलस्रोत20 साल बाद भी वो उपहार लगातार चल रहा है। पहले का कच्चा कुआं अब पक्के कुएं में तब्दील हो चुका है । पहले जिस कुएं से नसरीन रस्सी बाल्टी से पानी खींचती रही सुरक्षित जाली लगे कुएं में पानी की मोटर भी लगी है। पूरे परिवार की पानी की जरूरत को कुआं पूरी कर रहा है।

■ बेटे ने बढ़ाया मानआज नसरीन भोपाल में अपने परिवार के साथ खुशहाल जीवन बिता रही हैं। पढ़ाई के प्रति ललक के चलते उन्होंने हरदा से बीए किया। बतौर शिक्षिका के पद पर कार्य किया। बीएड करने के दौरान राजधानी में प्रॉपर्टी के क्षेत्र में कार्यरत नरेश मीना से उनकी मुलाक़ात हुई।

2018 में उन्होंने शादी की। फिलहाल नसरीन अपने 7 वर्षीय बेटे नवनीत के भविष्य को संवारने में जुटी हैं।नवनीत ने हाल ही में अंतरराष्ट्रीय मैथ्स ओलंपियाड (IMO) में स्टेट टॉपर (थर्ड रैंक) हासिल कर गोल्ड मेडल प्राप्त किया। नवनीत को स्कॉलरशिप से साथ प्रसिद्ध धाविका पी.टी. उषा द्वारा हस्ताक्षरित प्रमाण-पत्र भी मिला है।

■ नसरीन का सपनानसरीन आज भी गरीब तबके के बच्चों को शिक्षित करने का सपना देखती हैं और एक ऐसे मंच की तलाश में हैं जहां से वो अपने नेक इरादों को साकार कर सकें।

■ बेटी ने माता-पिता को दिया उपहारजैसे हर माता-पिता विदाई पर बेटी को उपहार देते हैं, नसरीन ने विदाई से पहले ही अपने बाबुल को जीवनभर का जलस्रोत उपहार में देकर एक नई मिसाल कायम की है। नसरीन की उपलब्धि पर पूरा परिवार नाज़ करता है।

■ किताब में दर्ज हुई जज़्बे की कहानीउल्लेखनीय है कि इंदौर एडिशनल कमिश्नर( कमर्शियल टैक्स) एवं लेखिका सपना शिवाले सोलंकी के हाल ही में प्रकाशित नौ कहानियों के संग्रह ‘थोड़ी सी धूप’ में नसरीन के इसी जज़्बे को ‘हारूंगी नहीं’ शीर्षक से कहानी का रूप दिया गया है।

मालूम हो, शिवाले मैडम तत्समय प्रशासनिक अधिकारी के पद पर हरदा में पदस्थ थीं। शिवाले मैडम ने कहा कि वे नसरीन से संपर्क कर उन्हें कहानी संग्रह भेंट करेंगी ।

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