भगवानपुरा पंचायत बाउंड्री निर्माण में अनियमितता के आरोप, ग्राम सभा में बिल और मौके की गिनती का हुआ मिलान ।

संवाददाता आनंद गवली हरदा/सिराली।

जिला हरदा, तहसील सिराली अंतर्गत ग्राम पंचायत भगवानपुरा में पंचायत बाउंड्री निर्माण कार्य को लेकर अनियमितता के आरोप सामने आए हैं।

मामले को लेकर 15 अगस्त को आयोजित ग्राम सभा की बैठक में भी चर्चा की गई। सरपंच की अनुपस्थिति में उपसरपंच सलीम कुरैशी ने ग्राम सभा की बैठक की अध्यक्षता की।ग्राम सभा के दौरान पंचायत बाउंड्री निर्माण से संबंधित बिल में दर्ज कॉलम की संख्या और मौके पर मौजूद कॉलम की संख्या का मिलान कराया गया।

मौके पर गिनती कराए जाने के दौरान बिल और स्थल पर दिखाई दे रहे निर्माण में अंतर होने की बात सामने रखी गई। इस संबंध में उपसरपंच सलीम कुरैशी को भी अवगत कराया गया।

उपसरपंच सलीम कुरैशी ने कहा कि इस मामले में सरपंच से बात की जाएगी तथा संबंधित इंजीनियर से निर्माण कार्य का इस्टीमेट लिया जाएगा। इसके बाद बिल, इस्टीमेट और मौके पर किए गए वास्तविक निर्माण का मिलान कर स्थिति स्पष्ट की जाएगी।

12 अगस्त को जनपद सीईओ से हुई थी चर्चामामले को लेकर 12 अगस्त को जनपद पंचायत खिरकिया की सीईओ रीना कुमारी से भी फोन पर चर्चा की गई थी। उन्होंने कहा था कि वह संबंधित इंजीनियर से बात करके मामले की जानकारी देंगी।

हालांकि, इसके बाद अभी तक मामले में कोई स्पष्ट जानकारी सामने नहीं आई है।जिला सीईओ को भी किया फोन, नहीं हुआ संपर्कपंचायत बाउंड्री निर्माण में सामने आए कथित अंतर के संबंध में जिला पंचायत सीईओ को भी फोन लगाकर मामले की जानकारी लेने और उनका पक्ष जानने का प्रयास किया गया, लेकिन उनके द्वारा फोन रिसीव नहीं किया गया। इसलिए जिला सीईओ का पक्ष खबर लिखे जाने तक सामने नहीं आ सका।

निष्पक्ष जांच की मांगग्राम सभा में मामला उठने के बाद ग्रामीणों ने पंचायत बाउंड्री निर्माण कार्य की निष्पक्ष जांच कराने की मांग की है। ग्रामीणों का कहना है कि बिल, माप पुस्तिका, इंजीनियर का इस्टीमेट, स्वीकृत कार्य एवं मौके पर हुए वास्तविक निर्माण का तकनीकी रूप से मिलान कराया जाना चाहिए।अब उपसरपंच द्वारा सरपंच से चर्चा करने और संबंधित इंजीनियर से इस्टीमेट लेने की बात कही गई है।

इसके बाद ही यह स्पष्ट हो सकेगा कि बिल में दर्ज कार्य और मौके पर हुए निर्माण में अंतर किस कारण से है।ग्रामीणों ने मांग की है कि पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर वास्तविक स्थिति सामने लाई जाए और यदि जांच में किसी प्रकार की अनियमितता पाई जाती है तो जिम्मेदारों के खिलाफ नियमानुसार कार्रवाई की जाए।

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